हिंदी को तुरंत शिक्षा का माध्यम बनाइये। - बेरिस कल्यएव
बोध कथाएं
बोध-कथाओं में कोई न कोई नैतिक शिक्षा अवश्य निहित रहती है और आप एक क्षण के लिए सोचने को बाध्य हो जाते हैं। यहाँ हम भारत-दर्शन के पाठकों के लिए बोध कथाएं संकलित कर रहे हैं। इन छोटी-छोटी कथा-कहानियों में परबत-सी ऊंची बातें और सागर-सी गहनता होती है निसंदेह यह कथाएं आपको पठनीय व रुचिकर लगेंगी। नैतिक सीख देती, बोध कथाओं का यह संकलन आपको भेंट।

Articles Under this Category

कलश का उत्तर - भारत-दर्शन संकलन

पानी से भरा कलश सजा हुआ था। उस पर चित्रकारी भी की गई थी। कलश पर एक कटोरी रखी थी, जिससे उसे ढक कर रखा गया था। कटोरी ने कलश से कहा-"भाई कलश। तुम बड़े उदार हो। तुम सदा दूसरों को देते ही रहते हो। कोई भी खाली बरतन आए, तुम उससे अपना जल उड़ेल देते हो। किसी को खाली नहीं जाने देते।"
...

ज्ञान-धारा | बोधकथा - भारत-दर्शन संकलन

एक बार भगवान बुद्ध से उनके शिष्य आनंद ने पूछा- ‘भगवन्! जब आप प्रवचन देते हैं तो सुनने वाले नीचे बैठते हैं और आप ऊंचे आसन पर बैठते हैं, ऐसा क्यों?’
...

सब्स्क्रिप्शन

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें