मेजबान
'कभी हमारे घर को भी पवित्र करो।' करूणा से भीगे स्वर में भेड़िये ने भोली-भाली भेड़ से कहा
'मैं जरूर आती बशर्ते तुम्हारे घर का मतलब तुम्हारा पेट न होता।' भेड़ ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया।
–खलील जिब्रान
![]() |
![]() |
Bharat-Darshan- World's first Hindi literary magazine on the net |
अन्य लघु-कथाएं
मेजबान - खलील जिब्रान
खुशामद - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
पिछले अँकों से
उलझन
दुख का कारण
समाधान
शब्द
दंभी
दूरदर्शी
मासूम सज़ा - अकबर बीरबल के किस्से
उदार दृष्टि
दूसरी दुनिया का आदमी - रोहित कुमार ‘हैप्पी’
न देने वाला मन
'कभी हमारे घर को भी पवित्र करो।' करूणा से भीगे स्वर में भेड़िये ने भोली-भाली भेड़ से कहा
'मैं जरूर आती बशर्ते तुम्हारे घर का मतलब तुम्हारा पेट न होता।' भेड़ ने नम्रतापूर्वक जवाब दिया।
–खलील जिब्रान
Bharat-Darshan
P.O.Box-16121 Sandringham Auckland-3 (New Zealand)
Ph: 0064-9-837 7052 Fax: 0064-9-837 3285 Mobile: 0064-21-171 3934
E-mail: info@bharatdarshan.co.nz