मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता? मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर, तुमने कब दी बात रात के सूने में तुम आने वाले, उत्सुकता की अकुलाहट में, मैंने पलक पाँवड़े डाले, बैठ कल्पना करता हूँ, पगचाप तुम्हारी मग से आती,
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मधुर प्रतीक्षा ही जब इतनी, प्रिय तुम आते तब क्या होता? मौन रात इस भांति कि जैसे, कोई गत वीणा पर बज कर, तुमने कब दी बात रात के सूने में तुम आने वाले, उत्सुकता की अकुलाहट में, मैंने पलक पाँवड़े डाले, बैठ कल्पना करता हूँ, पगचाप तुम्हारी मग से आती,
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