समस्त भारतीय भाषाओं के लिए यदि कोई एक लिपि आवश्यक हो तो वह देवनागरी ही हो सकती है। - (जस्टिस) कृष्णस्वामी अय्यर

Find Us On:

English Hindi
Loading

मीठा झगड़ा (बाल-साहित्य )

Click To download this content 

Author: प्रणेन्द्र नाथ मिश्रा

अकड़ के बोली गोल जलेबी, मुझसा कौन रसीला ?
मुझको चाहे सारी दुनिया, गाँव, शहर, क़बीला !

रबड़ी बोली , चुप कर झूठी! मुझको क्या बतलाती,
मुझको पाकर सारी दुनिया, बर्तन चट कर जाती !

काला जाम हँसा हो-हो कर, नहीं मिसाल हमारी,
जिसका काला रंग हो उसपर, मरती दुनिया सारी !

सावन के बादल हैं काले, काले कृष्ण हैं, काले राम,
जितना काला उतना मीठा, सबसे बढ़िया काला जाम !

रसगुल्ले ने देखा सबको, हलकी सी मुस्कान भरी,
मुझे चाहते राजा-रानी, बच्चे, बूढ़े और परी !

दूध बीच में आकर बोला, मत अब करो बड़ाई,
मेरे ही कारण तुम सबने, अपनी शान बढ़ाई !

मेरे घी में तली जलेबी, मुझसे बनती रबड़ी,
काला जाम बने खोये से, क्यों डींग हांकता तगड़ी !

मुझसे ही छेना बनता है, छेने से रसगुल्ला,
क्यों बघारते हो तुम शेखी, यूं ही खुल्लमखुल्ला !

मैं हूँ पिता तुम्हारा तुम सब मुझको करो प्रणाम,
मिलकर रहना भाई, बहनों, जाओ करो आराम !

-प्रणेन्द्र नाथ मिश्रा
[email protected]

 

Back

Comment using facebook

 
Post Comment
 
Name:
Email:
Content:
Type a word in English and press SPACE to transliterate.
Press CTRL+G to switch between English and the Hindi language.
 
 
 
 

सब्स्क्रिप्शन

सर्वेक्षण

भारत-दर्शन का नया रूप-रंग आपको कैसा लगा?

अच्छा लगा
अच्छा नही लगा
पता नहीं
आप किस देश से हैं?

यहाँ क्लिक करके परिणाम देखें

इस अंक में

 

इस अंक की समग्र सामग्री पढ़ें

 

 

सम्पर्क करें

आपका नाम
ई-मेल
संदेश