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Archive of हास्य-व्यंग विषेशांक मार्च-अप्रैल 2018 Issue

हास्य-व्यंग विषेशांक मार्च-अप्रैल 2018

23 मार्च 'भगतसिंह, सुखदेव व राजगुरू' का बलिदानी-दिवस होता है। उन्हीं की समृति में यहां शहीदी-दिवस को समर्पित विशेष सामग्री प्रकाशित की गई है।

 

भारत-दर्शन का मार्च-अप्रैल 2018 अंक हास्य-व्यंग्य विशेषांक है। इस अंक में हास्य-व्यंग्य रचनाओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। इस अंक में पढ़िए हास्य-कथा, कहानी, व्यंग्य व हास्य कविताएँ। इस बार पढ़िए भारतेंदु हरिश्चन्द्र, कवि चोंच, बेधड़क बनारसी, गोपाल प्रसाद व्यास, काका हाथरसी, अशोक चक्रधर, सुरेन्द्र शर्मा, हरिशंकर परसाई, प्रेमचंद की हास्य-व्यंग से भरपूर रचनाएँ।

आप सभी को होली की शुभ-कामनाएं।

भारत-दर्शन का पिछला होली-विशेषांक (2017) भी पढ़ें या प्रमुख रचनाएं पढ़ें जिनमें सम्मिलित हैं--

'होली की पौराणिक-कथाएं, मीरा के होली पद, मीरा भजन, 'श्याम सखा मोरी रंग दे चुनरिया' व 'होरी खेलत हैं गिरधारी', 'घासीराम के होली पद', 'सूरदास के पद', 'ॠतु फागुनी नियरानी हो' (कबीर), 'रसखान के फाग सवैय्ये' पढ़िए।

फणीश्वरनाथ रेणु की पहली कविता, 'साजन होली आई है', भारतेंदु की ग़ज़ल, 'गले मुझको लगा लो ए दिलदार होली में', निराला की कविता, 'खून की होली' व 'वसंत आया', , जयशंकर प्रसाद की कविता, 'होली की रात', प्रेमचंद की कहानी, 'होली की छुट्टी', यशपाल की कहानी, 'होली का मज़ाक', गोपालसिंह नेपाली की कविता, 'बरस-बरस पर आती होली', ललितकुमारसिंह 'नटवर' का होली गीत, 'आज की होली', जैमिनी हरियाणवी की हास्य कविता, 'प्यार भरी बोली', आलेखों में - डा जगदीश गांधी का, 'आपसी प्रेम एवं एकता का प्रतीक है होली', अशोक भाटिया का आलेख 'होली आई रे', 'लोकगीतों में झलकती संस्कृति का प्रीतक : होली' (आलेख), 'होली के विविध रंग' (आलेख), 'सबकी 'होली' एक दिन, अपनी 'होली' सब दिन' (आलेख), रंगों के त्यौहार में तुमने (कविता), तुझ संग रंग लगाऊं कैसे (कविता), अरी भागो री भागो री गोरी भागो, कल कहाँ थे कन्हाई (गीत), होली बाद नमाज़ (कहानी), अजब हवा (गीत), आओ होली (कविता), होली के दोहे, रंगो के त्यौहार में तुमने (कविता), रंग की वो फुहार दे होली (कविता), हास्य रस में 'काव्य मंच पर होली' भी पढ़ें ।

 

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