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भारत-दर्शन, हिंदी साहित्यिक पत्रिका - Bharat-Darshan Hindi Literary magazine

भारत-दर्शन में आपका स्वागत है। इस वर्ष 13 अगस्त 2011 को रक्षा बंधन का त्योहार है।

रक्षा बंधन का त्योहार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।  उत्तरी भारत में यह त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है औेर इस त्योहार का प्रचलन सदियों पुराना बताया गया है। इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए अपना सनेहाभाव दर्शाते हैं।

रक्षा बंधन का उल्लेख हमारी पौराणिक कथाओं व महाभारत में मिलता है और इसके अतिरिक्त इसकी ऐतिहासिक व साहित्यिक महत्ता भी उल्लेखनीय है।

आइए, रक्षा-बंधन के सभी पक्षों पर विचार करें।

 

देश पर मिटने वाले शहीदों की याद में

सन् 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ का आरम्भ किया महर्षि दयानन्द सरस्वती ने
और इस यज्ञ को पहली आहुति दी मंगल पांडे ने। देखते ही देखते यह यज्ञ चारों ओर
फैल गया। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्यां टोपे और नाना राव जैसे योद्धाओं ने इस
स्वतंत्रता के यज्ञ में अपने रक्त की आहुति दी। दूसरे चरण में 'सरफरोशी की तमन्ना'
लिए रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राजगुरू, सुखदेव आदि
देश के लिए शहीद हो गए। तिलक ने 'स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है' का उदघोष
किया व सुभाष चन्द्र बोस ने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा' का मँत्र दिया।
अहिंसा और असहयोग का अस्त्र लेकर महात्मा गाँधी और गुलामी की बेड़ियां तोड़ने को
तत्पर लौह पुरूष सरदार पटेल ने अपने प्रयास तेज कर दिए। 90 वर्षो की लम्बी संर्घष
यात्रा के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता देवी का वरदान मिल सका।

15 अगस्त भारत का स्वतंत्रता दिवस है। आजादी हमें स्वत: नहीं मिल गई थी अपितु एक
लम्बे संर्घष और हजारों-लाखों लोगों के बलिदान के पश्चात ही भारत आजाद हो पाया था।
देश पर मर-मिटने वाले हजारों शहीदो में से कुछ के संस्मरण इस अँक में प्रकाशित किए जा
रहे हैं।

 

सनद रहे कि यह साईट भारत-दर्शन का संकलन है व मुख्य साईट आप निम्न वेब पते पर देख सकते हैं:
www.bharatdarshan.co.nz

अति शीघ्र भारत-दर्शन का न्य रूप आपके समक्ष होगा जिसपर अभी कम चल रहा है।

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