संजय वन के राजा वीरू शेर के दरबार में गाने की प्रतियोगिता का आयोजन था राज्य के अच्छे-अच्छे नामी गायक वहां इक्ट्ठा हो रहे थे। काली कोयल, मीना मैना,चन्दू हाथी, चन्नी गिलहरी, बीनू बन्दर जैसे जंगल के जाने-माने गायक आए थे। सबके आश्चर्य का ठिकाना तो तब न रहा जब काजू कौआ भी वहॉं गाना गाने पहुंच गया। सब उसकी नादानी पर हॅंसने लगे। जंगल के सभी लोग यह जानते थे कि काजू कौए से बेसुरा कोई नहीं गाता। सबने उसे समझाया भी लेकिन वह नहीं माना और प्रतियोगिता में शामिल हो गया। कुछ देर बाद दरबार लग गया। वीरू शेर सिंहासन पर विराजमान हो गया और उसने गाने की प्रतियोगिता शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद तो सारा माहौल संगीतमय हो गया। सभी गायकों ने एक से बढ़कर एक गाने गाए लेकिन काली कोयल ने तो कमाल ही कर दिया। उसके जैसा सुरीला गाना कोई नहीं गा सका। सबसे बाद में काजू कौए को गाने का मौका मिला। उसका गाना सुनकर वहाँ मौजूद सभी लोग हँसने लगे। काजू कौआ बहुत दुखी हुआ । वह वहाँ से उड़कर चला गया। इसके बाद पुरस्कार की घोषणा की गई। जैसी कि आशा थी वैसा ही हुआ। काली कोयल को ही विजेता घोषित किया गया। वह बहुत खुश हुई। उसे पुरस्कार के साथ ही वीरू शेर ने एक वर्ष के लिए ‘दरबारी गायक’ की उपाधि भी प्रदान की। समारोह खत्म होने के बाद सभी लोग काली कोयल को बधाई देकर वापस चले गए। बाद में यह खबर सारे जंगल में फैल गई कि काजू कौआ जंगल छोड़ कर चला गया है। उसे बहुत ढूँढा भी गया लेकिन वह नहीं मिला। समय गुजरता गया। काली कोयल अब पहले जैसी नहीं रह गई थी । वह बड़ी ही घमण्डी हो गई थी। किसी से सीधे मुँह बात न करती। कोई भी गाना गाता तो उसकी हँसी उड़ाती, मजाक बनाती। कहती कि तुम्हें गाना नहीं आता। कौए जैसा गाते हो। उसकी इस बात का कोई विरोध नहीं कर पाता क्योंकि उसके जैसा कोई गा नहीं सकता था। इसी तरह एक वर्ष बीत गया। वीरू शेर ने फिर प्रतियोगिता का आयोजन किया। सभी एक बार फिर इक्ट्ठे हुए लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि कोई भी गाना गाने की प्रतियोगिता में शामिल नहीं होना चाहता था। किसी ने भी काली कोयल की चुनौती स्वीकार नहीं की। अन्त में वीरू शेर ने काली कोयल को ही विजेता घोषित करने का निर्णय ले लिया। इस निर्णय से जंगलवासियों में निराशा की लहर दौड़ गई। कोई भी नहीं चाहता था कि काली कोयल ‘दरबारी गायक’ बने। उसके बुरे व्यवहार के कारण लोग उसे पसन्द नहीं करते थे। फिर भी चुप रहना सबकी मजबूरी थी क्योंकि काली कोयल का मुक़ाबला करना किसी के बस की बात नहीं थी। तभी एक घटना घटी। वहाँ एक अजीब सा पक्षी उड़कर आया। उसका सारा शरीर सुनहरा था। वह बड़ा ही सुन्दर लग रहा था। सभी शान्त होकर उसकी ही ओर देखने लगे। उस पक्षी ने वीरू शेर को प्रणाम किया और बोला, "महाराज मैं गाने की प्रतियोगिता में शामिल होना चाहता हूँ।" वीरू शेर के कुछ कहने से पहले ही काली कोयल बोल पड़ी, "क्यों अपना मजाक बनवाना चाहते हो? मुझसे कोई भी जीत नहीं सकता।" "मैं तुम्हारी चुनौती स्वीकार करता हूँ।" सुनहरे पक्षी ने कोयल को जबाब देते हुए कहा। राजा सहित सभी लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। वीरू शेर ने प्रतियोगिता शुरू करने का आदेश दिया। पहले काली कोयल ने गाना गाया । जिसे बहुत सराहा गया। उसका गाना सुनकर सबको लगने लगा कि सुनहरा पक्षी निश्चित ही हार जाएगा लेकिन हुआ कुछ और। जब सुनहरे पक्षी ने गाना शुरू किया तो सबने दॉंतो तले अँगुलियां दबा ली। काली कोयल तो हैरान रह गई। उसे उम्मीद ही नहीं थी कि सुनहरा पक्षी इतना अच्छा गा सकेगा। वीरू शेर ने सुनहरे पक्षी को विजेता घोषित कर दिया और साथ ही 'दरबारी गायक' की उपाधि भी प्रदान की। काली कोयल का घमण्ड चूर-चूर हो चुका था। वह सिर झुकाए एक कोने में खड़ी थी। पुरस्कार देने के बाद वीरू शेर ने सनहरे पक्षी से उसका परिचय पूछा तो बोला, "मेरा नाम काजू कौआ है।" यह सुनकर वीरू शेर के आश्चर्य का ठिकाना न रहा। कोई भी यह बात मानने को तैयार नहीं था जिसे देखकर वह पक्षी उड़ गया और तालाब में जाकर डुबकी लगा दी। अब उसके शरीर पर चढ़ा सुनहरा रंग उतर गया था। सारे जंगलवासी फटी आँखों से यह सब देखते रहे। अब उन्हें विश्वास करना ही पड़ा कि वह सचमुच कोजू कौआ ही है। काली कोयल ने उससे क्षमा मॉंगी और सफलता का रहस्य भी पूछा। काजू कौए ने बताया,"पिछली बार हारने पर मेरा बहुत ही उपहास हुआ जिससे मैं बड़ा दुखी था इसलिए मैं यह जंगल छोड़ कर दूसरे जंगल चला गया। वहाँ मैंने लगन से गाने का अभ्यास किया और जिसका परिणाम सबके सामने है।" "लेकिन रूप बदलकर क्यों आए? यह बात समझ में नहीं आई।" वीरू शेर ने पूछा तो कौए ने बताया, "अगर मैं रुप बदलकर न आता तो महाराज आप मुझे बेसुरा गाने वाला काजू कौआ समझकर प्रतियोगिता में शामिल ही नहीं होने देते।" काजू कौए का उत्तर सुनकर महाराज उसकी प्रशंसा करने लगे और सारे जंगल को अभ्यास के महत्व का पता लग गया था। - आशीष शुक्ला |
इस अँक में हिन्दी बाल कथाएँ, बाल कहानियां, बाल कविताएं, पौराणिक कथाएं, कहानियाँ, व हिंदी बाल साहित्यिक समाचार।

