| रोहित कुमार 'हैप्पी' | Rohit Kumar 'Happy' |
रोहित कुमार 'हैप्पी' न्यूज़ीलैंड में हिंदी न्यू मीडिया के माध्यम से हिंदी भाषा, लेखन व साहित्य के प्रचार-प्रसार हेतु प्रयासरत हैं। रोहित मैस्सी यूनिवर्सिटी, न्यूज़ीलैंड से पत्रकारिता में प्रशिक्षित हैं व इसके अतिरिक्त उन्होंने न्यूज़ीलैंड में इंवेस्टिगेटिव सर्विसिस, ग्राफिक्स व वेब डिवेलपमैंट में भी प्रशिक्षण लिया।
आप मूलत: कैथल (हरियाणा) से सम्बंध रखते हैं और आप कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर हैं। हिंदी में कविता, ग़ज़ल, कहानी और लघु-कथा विधाओं पर लेखन करते हैं।
रोहित न्यूज़ीलैंड से प्रकाशित इंटरनेट पर विश्व की पहली हिंदी पत्रिका, 'भारत-दर्शन' का संपादन व प्रकाशन करते हैं व निरंतर हिंदी-कर्म में अग्रसर हैं। यह पत्रिका 1996 से इंटरनेट पर प्रकाशित हो रही है।
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| Author's Collection |
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| न्यूज़ीलैंड की हिंदी पत्रकारिता |
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यूँ तो न्यूजीलैंड में अनेक पत्र-पत्रिकाएँ समय-समय पर प्रकाशित होती रही हैं सबसे पहला प्रकाशित पत्र था 'आर्योदय' जिसके संपादक थे श्री जे के नातली, उप संपादक थे श्री पी वी पटेल व प्रकाशक थे श्री रणछोड़ क़े पटेल। भारतीयों का यह पहला पत्र 1921 में प्रकाशित हुआ था परन्तु यह जल्दी ही बंद हो गया।
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| मदर डे |
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'आप 'मदर डे' को क्या करते हैं?'
'कुछ नहीं।'
'अरे?' मेरे ग़ैर-भारतीय मित्र ने आश्चर्य प्रकट किया।
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| लायक बच्चे |
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अकेली माँ ने उन पाँच बच्चों की परवरिश करके उन्हें लायक बनाया। पांचों अपने पाँवों पर खड़े थे। उनको खड़ा करते-करते माँ बैठ गई थी पर उसे खड़ा करने को कोई नहीं था। माँ ने एक आधा नालायक़ पैदा किया होता तो शायद आज साथ होता पर लायक बच्चे तो बहुत व्यस्त हो चुके थे। ... |
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| एक ऐसी भी घड़ी आती है / ग़ज़ल |
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एक ऐसी भी घड़ी आती है जिस्म से रूह बिछुड़ जाती है
अब यहाँ कैसे रोशनी होती ना कोई दीया, ना बाती है
हो लिखी जिनके मुकद्दर में ख़िज़ाँ कोई रितु उन्हें ना भाती है
ना कोई रूत ना भाये है मौसम चांदनी रात दिल दुखाती है
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| न्यूज़ीलैंड में हिन्दी पठन-पाठन |
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यूँ तो न्यूज़ीलैंड कुल 40 लाख की आबादी वाला छोटा सा देश है, फिर भी हिंदी के मानचित्र पर अपनी पहचान रखता है। पंजाब और गुजरात के भारतीय न्यूज़ीलैंड में बहुत पहले से बसे हुए हैं किन्तु 1990 के आसपास बहुत से लोग मुम्बई, देहली, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा इत्यादि राज्यों से आकर यहां बस गए। फिजी से भी बहुत से भारतीय राजनैतिक तख्ता-पलट के दौरान यहां आ बसे। न्यूज़ीलैंड में फिजी भारतीयों की अनेक रामायण मंडलियाँ सक्रिय हैं। यद्यपि फिजी मूल के भारतवंशी मूल रुप से हिंदी न बोल कर हिंदुस्तानी बोलते हैं तथापि यथासंभव अपनी भाषा का ही उपयोग करते हैं। उल्लेखनीय है कि फिजी में गुजराती, मलयाली, तमिल, बांग्ला, पंजाबी और हिंदी भाषी सभी भारतवंशी लोग हिंदी के माध्यम से ही जुड़े हुए हैं।
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| लोहड़ी | आलेख |
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मकर संक्रांति से एक दिन पूर्व उत्तर भारत विशेषतः पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार मनाया जाता है। किसी न किसी नाम से मकर संक्रांति के दिन या उससे आस-पास भारत के विभिन्न प्रदेशों में कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है। मकर संक्रांति के दिन तमिल हिंदू पोंगल का त्यौहार मनाते हैं। इस प्रकार लगभग पूर्ण भारत में यह विविध रूपों में मनाया जाता है। ... |
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| न्यू मीडिया |
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न्यू मीडिया वास्तव में परम्परागत मीडिया का संशोधित रूप है जिसमें तकनीकी क्रांतिकारी परिवर्तन व इसका नया रूप सम्मलित है। आइए, हिंदी न्यू मीडिया के स्वरुप, उद्भव और विकास पर एक दृष्टिपात करें।
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| न्यूज़ीलैंड एक परिचय |
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न्यूज़ीलैंड (New Zealand) या आओटियारोआ (Aotearoa - न्यूज़ीलैंड का माओरी नाम) दक्षिण प्रशान्त महासागर में आस्ट्रेलिया के 2000 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 269,000 वर्ग किलोमीटर है। यह क्षेत्रफल व आकार की दृष्टि से जापान से कुछ छोटा व ब्रिटेन से थोड़ा सा बड़ा कहा जा सकता है। न्यूज़ीलैंड की राजधानी वैलिंगटन है तथा सबसे बड़ा शहर ऑकलैंड है। ऑकलैंड को न्यूज़ीलैंड की वाणिज्य राजधानी भी कहा जा सकता है। न्यूज़ीलैंड की जनसंख्या लगभग 40 लाख ( 4 मिलियन) है जिसमें 80 प्रतिशत यूरोपियन समुदाय, सात में से एक माओरी (तांगाता फेनुआ, मूल या देशी लोग) 15 में से एक एशियन और 16 में से एक प्रशान्त द्वीप मूल के लोग सम्मिलित हैं। न्यूज़ीलैंड तेजी से बहु-संस्कृति समाज (Multi-cultural Society) के रूप में परिवर्तित होता जा रहा है।
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| मुट्ठी भर रंग अम्बर में |
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मुट्ठी भर रंग अम्बर में किसने है दे मारा आज तिरंगा दीखता है अम्बर मोहे सारा
आज ब्रज बन जाएगा नगर अपना सारा आज रंगा ले हमसे रे मुखड़ा अपना प्यारा
'बुरा ना मानो होली है' होती आज ठिठोली है ... |
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| पागल |
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शहर में सब जानते थे कि वो पागल है। जब-तब भाषण देने लगता, किसी पुलिस वाले को देख लेता तो कहने लगता, 'ये ख़ाकी वर्दी में लुटेरे हैं। ये रक्षक नहीं भक्षक हैं। गरीब जनता को लूटते हैं। सरकार ने इन्हें लूटने का लाइसेंस दे रखा है। ये लुटेरे पकड़ेंगे, चोर पकड़ेंगे...., ये तो खुद चोर हैं, लुटेरे हैं ये! किसी अमीर को देखता तो कहने लगता, 'ये लाला चोर है, ग़रीबों का खून चूसता है। खून पी-पी कर पेट मोटा हो रहा है स्साले का!' ...और लाला के चमचे उसे दो-चार जड़ देते। आज शहर में नेता जी आये हुए थे, भाषण चल रहा था। अचानक एक ओर कुछ गड़बड़ी देखी तो मैं भी उधर हो लिया। उधर पागल बोले जा रहा था, 'ये नेता झूठा है, ये नेता चोर है। कोई मत देना वोट इसे। ये धोखेबाज़ और फ़रेबी है। पैसे से वोट ख़रीदता है। कहाँ से आया इसके पास इतना पैसा? गरीब को रोटी, कपड़ा और मकान का मसला है और इसे कुर्सी का।' लोग हँस रहे थे व उसकी मसख़री कर रहे थे। ...और वो बोले जा रहा था 'ये सब चोर हैं, सब नेता चोर हैं। कोई भी हो सब पार्टिएं चोर हैं, बस नाम बदलते हैं पर धंधा एक है। छोटा चोर एम. एल. ए. बड़ा लुटेरा मंत्री, और उससे बड़ा डाकू मुख्यमंत्री। ये मुख्यमंत्री बनेगा, मारो साले को, ये डाकू है।' मारो-मारो कहता हाथ में पत्थर लिए, हाथ लहराता वह पागल नेता जी की ओर बढ़ चला। 'बेचारा पागल है।' कहते हुए कुछ पुलिस वाले उसे घसीट कर पंडाल से बाहर कर रहे थे।
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