दिशा और दशा
मुझे भारत में आए हुए कई महीने हो गए थे और अब तो वापिस न्यूजीलैड लौटने का समय हो गया था।
अरे भई, तुम्हारी सब ख़रीदारी कर लाई हूँ, लो पकड़ो ये किताबें।' बडी दीदी ने सामान मुझे थमाते हुए कहा, 'अरे हाँ, बस वो भारत माता वाली तस्वीर जो तुमने कही थी, कहीं नहीं मिली। तुम अगर बाज़ार जाओ तो खुद ही देख लेना।'
'अच्छा ठीक है, मैं देख लूंगा।'
फिर मैं भारत माता की तस्वीर लेने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान और दूसरी से तीसरी घूमता रहा मगर तस्वीर नहीं मिली।
एक-दो दुकानदारों ने तो मेरी मांग सुनकर मुझे बडे आश्चर्य से देखा। मुझे अपने देश का यह बेगानापन बडा अखरा! मैं अपने देश भारत में ही तो भारत माता की तस्वीर खोज रहा था, इसमें हैरानी की क्या बात?
हैरानी तो मुझे होनी चाहिए, उन दुकानों पर जिनके पास सभी फ़िल्मी सितारों की तस्वीरों तो मिलती हैं पर भारत माता की तस्वीर नहीं है।
खैर, मैं भी आसानी से हार मानने वाला कहाँ था! अपने एक चित्रकार मित्र को समस्या बताई और उन्होंने तस्वीर बना कर मेरी समस्या का समाधान कर दिया। मैं प्रसन्नचित्त घर लौट आया।
घर में कई परिचित सपरिवार मुझे मिलने आए हुए थे। मुझे देखते ही दीदी ने पूछा, 'अरे तस्वीर मिल गई क्या?'
मैंने 'हामी' में सिर हिला दिया।
'दिखा तो!'
और सभी मेहमान भी तस्वीर देखने लगे।
एक साथ, 'बहुत सुंदर! बहुत सुंदर!!' की कई आवाज़ें आई। और इतना सुनते ही घर और घर में आए मेहमानों के बाहर खेलते बच्चे भी तस्वीर देखने को उमड़ पड़े और तस्वीर देखकर एक-दूसरे से पूछने लगे, 'यह किसकी तस्वीर है?' फिर दोबारा खेलने लगे। इधर केबल टीवी पर कोई कार्यक्रम चलने लगा, बच्चे खेल छोड़ टीवी देखने लगे।
'शाहरूख खान, अमीर खान, ऐश्वर्य राय, गोबिंदा, काजोल, करिश्मा कपूर, जूही चावला, रवीना टण्डन, माधुरी' बच्चों को सबके नाम मालूम थे।
मैं भारत के भावी कर्णधारों की दिशा और भारत की दशा के बारे में सोचने लगा। यह दिशा हमारी क्या दशा करेगी?
-रोहित कुमार 'हैप्पी' ऑकलैंड
रोहित कुमार हैप्पी की अन्य कहानियाँ
दूसरा रुख - रोहित कुमार ‘हैप्पी’चित्रकार दोस्त ने भेंट स्वरूप एक तस्वीर दी। आवरण हटा कर देखा तो निहायत ख़ुशी हुई। तस्वीर भारत माता की थी। माँ-सी सुंदर, भोली सूरत, अधरों पर मुसकान कंठ में सुशोभित आभूषण, मस्तक को और ऊँचा करता हुआ मुकुट व हाथ में तिरंगा।
नया मकान - रोहित कुमार ‘हैप्पी’
कई साल किराये पर रहने के बाद आज उसने नया मकान खरीद ही लिया था।
'चलो आज ईश्वर की कृपा से घर भी बन गया।' माँ ने प्रसन्नता जाहिर की।
पूरी कहानी पढ़ें
दूसरी दुनिया का आदमी - रोहित कुमार ‘हैप्पी’
वो शक्ल सूरत से कैसा था, बताने में असमर्थ हूँ। पर हाँ, उसके हाव-भावों से ये पूर्णतया स्पष्ट था कि वो काफी उदास और चिंतित था।
पूरी कहानी पढ़ें


